-अशोक मिश्रतुम्हारे बाप का है राज यह मैं जानता हूंकटेगा शीश मेरा आज, यह मैं जानता हूं।शांति का पाठ पढ़ाने नगर में आ गए हिजड़ेबजेंगे फिर वही सुरसाज, यह मैं जानता हूं।मंदिर-मस्जिद की बातें सुनके सुखिया रो पड़ीलुटेगी फिर उसी की लाज, यह मैं जानता हूं।महल में शांति छायी है, नगर के लोग सहमे हैंगिरेगी झोपड़ी पर गाज, यह मैं जानता हूं।प्रेम के किस्से किताबों में पढ़ा जब भी पढ़ा हैतुम्हारे प्रेम का क्या राज, यह मैं जानता हूं।फूल खुशियों के खिले होंगे तुम्हारे गांव...