सोमवार, 28 मार्च 2011

भारतीय गणतंत्र अब पूरी तरह जनता के लिए एक षड़यंत्र बन चुका है। पूरा का पूरा देश षड़यंत्रों में फंसा नजर आ रहा है। आज देश में आये दिन होने वाले षड़यंत्र और घोटाले भारतीय गणतंत्र की पहचान बन चुके है। भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की अवैध संतान यानि दलाल लोक सेवकों के सहयोग से नित नये षड़यंत्रों द्वारा आम आदमी के उत्पीड़न और शोषण में लगे है और जनता को सरेआम दोनों हाथों से लूटने में लगे है।...

सोमवार, 21 मार्च 2011

हमारी संस्कृति और संस्कारों में यह सिखाया गया है कि व्यक्ति को उतना ही बोलना चाहिए जितना पालन कर सके, नहीं तो शब्दों की सार्थकता के साथ बोलने वाले की भी सार्थकता समाप्त हो जायेगी। कथनी और करनी की एकरूपता को हमारे यहां व्यक्ति के आचरण से जोड़ा गया है। जिसकी कथनी और करनी एक होती है उसे ईमानदार और श्रेष्ठ पुरूष की संज्ञा दी गयी है। वैसे भी दैनिक व्यवहार में एक दूसरे की बातों के आधार पर ही दैनिक कार्यों को संपादित करते है। हमारे शास्त्रों मे अक्षर को...

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