अब तक सुना था कि विद्या विनय सिखाती है। लेकिन मौजूदा समय में यह बात पलट चुकी है। आज की विद्या भ्रष्ट बनाती है। ऐसे प्रमाणों से रोज अखबार भरे रहते है। देश में जितने भी बड़े घोटाले अब तक हुए है , उन सब में उच्च शिक्षा प्राप्त लोगो का ही बोलबाला देखा और पाया गया है। नौकरशाही का भ्रष्ट चरित्र किसी से छुपा नहीं है। भ्रष्ट नौकरशाही के आगे समूची व्यवस्था नतमस्तक है। अपने को आला दर्जे का शिक्षित और समाज व् व्यवस्था का मसीहा कहने वाले पत्रकार भी भ्रष्टाचार...
शनिवार, 17 जुलाई 2010
रविवार, 11 जुलाई 2010
1:07 am
विवेक दत्त मथुरिया
1 comment
महंगाई क्या है ? चुनावी लंगरों की हलुआ,पूरी का हिसाब है। जिसके लिए नेता जी को और उनकी पार्टी को मजबूरन व्यापारी और उद्योगपतियों से आर्थिक सहयोग लेना पड़ा। यह महंगाई कुछ और नहीं कार्यकर्ताओं की चुनावी हलुआ, पूरी की ब्याज सहित वापसी है। इसे ही सरकारी कृतज्ञता कहते है।चुनावों में न जनता लंगर खाती और न महंगाई बढ़त। महंगाई के लिए सीधे तौर पर जनता ही दोषी है। आखिर सहयोग के लिए कृतज्ञता प्रकट करना किसी भी द्रष्टि से गलत नहीं है। जब उन्होंने चुनाव जैसे संघर्ष...
मंगलवार, 6 जुलाई 2010
3:52 am
विवेक दत्त मथुरिया
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क्यों चिल्लाते हो ?चहु ओर भ्रष्टाचार हैयह ड्रामा है या सच्चाई ?तुम्हारी परिभाषा अजीब हैकाम हो जाये तो सब ठीक,नहीं तो भ्रष्टाचार ।अरे! तुम तो बुद्धिजीवी हो ,तीसमारखां होसमाज के नेतृत्वकर्ता हो ।दो अपने चिंतन कोक्रांतिकारी आयामक्यों दोगे ?अरे! सब जानते हैंकोठी किसकी ?त्यागी जी कीआवाज कहाँ से ?मौनी बाबा के आश्रम सेबच्चे किसके ?ब्रह्मचारी जी...
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