
वक्त है आतंक के खिलाफ एकता का संदेश देने काविवेक दत्त मथुरियाकूटिनीति के प्रख्यात आचार्य चाणक्य ने कहा था कि किसी भी राज्यव्यवस्था का कर्तव्य, आक्रमण से अपनी प्रजा की रक्षा करना होता है। प्रजा का सुख ही राजा का सुख और प्रजा का हित ही राजा का हित । प्रजा के सुख और हित को दो स्थानों से खतरा होता है। पहला बाह्य शत्रु का है, तो दूसरा राज्य के अंदर मौजूद शत्रु का।...