रविवार, 22 सितंबर 2013

 मैं इस वक्त, बेवक्त हूं  ------------------- मैं इस वक्त, बेवक्त हूं हूं तो पढा—लिखा पर जाहिल और जलील हूंक्योंकि बीच बाजार खडा हूंयहां रिश्ते भी तिजारत हैइसलिए बेवक्त हूंमेरी परेशानी यह हैमेरे पास दो चहरे नहीं हैदूसरा चेहरा कहां से लाउंऔर किससे लाउं जो दुनिया को पसंद आएमेरे विचार भी समय से मेल नहीं खातेकैसे गुजारा हो इस दुनिया मेंजीना चाहता हूं मौत का भय भी नहीं हैजीना चाहता जुल्मों की इंतहा के तककम से कम मौत को मुझ से मोहब्बत हो जाएऔर...
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